The best Motivational Hindi story

 हम बहुत आम जगहों से आए थे

बहुत आम जगहों पर रहे

बहुत आम जगहों पर पढ़े

और बेहद आम जगहों पर खाया

जब अमीर लोग बड़े नोट निकाला करते थे

हमारी जेब में कुछ सिक्के खनकते थे

हम सब एक जैसे नहीं थे

फिर भी हम शामिल थे रेस में 

एक ऐसे घोड़े की तरह

जिसकी टाँगों पर

पूरे खानदान की उम्मीदों का बोझ टिका था

और वह बोझ इतना था कि 

थोड़ा और बढ़ते ही 

हम चटक सकते थे

टूट सकते थे, बिखर सकते थे।


हमारे पास खोने को नींदें थीं

औ‌र‌ बेचने को सपने 

इसके अलावा कुछ और नहीं 

जिसे दाव पर लगा सकते।

हमने पढ़ीं रात भर किताबें 

और लड़े सपनों के लिए 

कितना कुछ और था‌ जो हम कर सकते थे

पर मारे गए दूसरों की उम्मीदों पर ख़रा उतरते हुए।

M.Bele🙏

Comments

Popular posts from this blog